आप सरकार शिक्षा माफियाओं से मिली, 780 स्कूलों ने अभिभावकों से ‘लूटी रकम’ नहीं लौटाई

आप पार्टी की चुनी हुई सरकार शिक्षा में क्रन्तिकारी सुधार के दावे तो बहुत करती है लेकिन उसकी योजनायें सिर्फ मीडिया की सुर्ख़ियों में ही दिखती हैं. जमीनी स्तर पर आम जनता को इससे कोई लाभ होता नहीं दिख रहा. अपने चुनावी घोषणा पत्र में आप पार्टी ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोत्तरी पर लगाम की बात की थी लेकिन 2009 में अभिभावकों से ‘फीस’ के नाम पर लूटे गए लगभग 677 करोड़ रुपये से ज्यादा अभी भी स्कूल माफियाओं की जेब में पड़े हैं.

आश्चर्य यह है कि कभी शीला दीक्षित की नीतियों का विरोध करने वाली आप पार्टी, पिछले लगभग चार वर्षों से कांग्रेस की ही तर्ज पर दिल्ली के शिक्षा माफियाओं को शरण दे रही है. यह आप पार्टी के नेताओं और शिक्षा माफियाओं के गठजोड़ का ही नतीजा है कि 17 अक्टूबर 2017 को आप पार्टी की चुनी हुई सरकार ने दिल्ली में निजी स्कूलों को 2009 की तर्ज पर सातवाँ वेतन आयोग लागू करने के नाम पर मनमाफिक फीस बढाने का आदेश दे दिया था. अभिभावकों ने सरकार के इस तानाशाही आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में गुहार लगायी तब जाकर यह आदेश निरस्त हुआ. आप पार्टी की चुनी हुई सरकार की भ्रष्ट शिक्षा नीति के कारण आज दिल्ली का हर क्षात्र, अभिभावक, शिक्षा और  ईमानदार स्कूल संचालक परेशान है.

इसी बुधवार 5 दिसम्बर को ‘फीस रिव्यु समिति’ ने दिल्ली हाई कोर्ट को सौपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अभी तक 1216 निजी स्कूलों की जाँच हो चुकी है जिसमें 785 स्कूलों ने 2009 में गैरकानूनी तरीके से फीस के नाम पर अभिभावकों से धन लूटा था जिसमें से मात्र 5 ने रकम वापस किया है. बता दें कि फीस के नाम पर लूट की जाँच के लिए सन 2011 में सेवानिवृत न्यायाधीश अनिल देव समिति का गठन हुआ था जिसने अभी तक कई चरणों में अपनी रिपोर्ट सौपी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कई बार आदेश दिया है कि जिन स्कूलों ने फीस के नाम पर अभिभावकों को लूटा था उनसे 9% व्याज के साथ पूरी रकम वसूल किया जाय. व्याज मिलाकर अभी यह रकम लगभग 750 करोड़ रुपये है. इसके अतिरिक्त 254 स्कूलों ने फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर 177 करोड़ रुपये फीस के नाम पर वसूला था, जिस पर उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के जाँच करने को कहा है. लगभग सभी निजी स्कूलों ने 32 महीने पहले यानि की 2006 से जोड़कर फीस वसूला था. जस्टिस अनिल देव समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कई स्कूलों के मेनेजर ने तो फीस के धन से महँगी SUV गाड़ियाँ तक खरीद लिया था.    दिल्ली उच्च न्यायालय बार बार आदेश के बावजूद आप पार्टी की चुनी हुई सरकार ने मीडिया में बयान देकर जनता को बरगलाने से ज्यादा कुछ नहीं किया. आप पार्टी की सरकार ने 23 मई 2018 को मीडिया में एक बयान दिया कि फीस वापस न करने पर 575 स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी. तब से कोई कार्यवाही नहीं हुई. इससे यह सिद्ध होता है कि आप पार्टी के बहुत सारे नेता इन स्कूल माफियाओं से मिल गए हैं और चुनी हुई सरकार उन सबको सरकारी संरक्षण दे रहे हैं.

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